शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की "नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने" पर 382वीं रिपोर्ट संबंधी प्रेस विज्ञप्ति।
राज्यसभा सचिवालय शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की "नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने" पर 382वीं रिपोर्ट संबंधी प्रेस विज्ञप्ति। प्रविष्टि तिथि: 09 OCT 2026 5:33PM by PIB Delhi श्री मुकुल वासनिक , संसद सदस्य , राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित शिक्षा , महिला , बाल , युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्तूबर , 2026 को उच्चतर शिक्षा विभाग
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शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की "नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने" पर 382वीं रिपोर्ट संबंधी प्रेस विज्ञप्ति।
प्रविष्टि तिथि: 09 OCT 2026 5:33PM by PIB Delhi
श्री मुकुल वासनिक , संसद सदस्य , राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित शिक्षा , महिला , बाल , युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्तूबर , 2026 को उच्चतर शिक्षा विभाग , शिक्षा मंत्रालय से संबंधित "राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार और सुदृढीकरण" विषय पर 382 वाँ प्रतिवेदन माननीय सभापति , राज्य सभा को प्रस्तुत किया। 2. समिति ने 382वें प्रतिवेदन की तैयारी के दौरान उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय के सचिव; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अध्यक्ष; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक; डॉ. के. राधाकृष्णन, पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग एवं उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष तथा विभाग के अन्य प्रतिनिधियों के विचार सुने और विषय की विस्तृत जाँच की। 3. समिति ने 25 अगस्त , 2026 को आयोजित अपनी बैठक में इस प्रतिवेदन पर विचार किया और इसे स्वीकार किया। प्रतिवेदन में समिति द्वारा की गई समुक्तियाँ/सिफारिशें इसके साथ संलग्न हैं। 4. यह प्रतिवेदन निम्नलिखित लिंक पर भी उपलब्ध है:- https://sansad.in/rs/committees/16?departmentally-related-standing-committees 382वाँ प्रतिवेदन समिति की समुक्तियाँ और सिफारिशें 10.1 समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अत्यंत महत्त्वपूर्ण दायित्व सौपा गया है। यह भारत के सभी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं - अन्य के साथ-साथ जेईई-मुख्य, नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और सीयूईटी - का आयोजन करती है और इसलिए उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है। कुल मिलाकर, एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ छात्र बैठते हैं। इसके अलावे नीट जैसी अखिल भारतीय परीक्षा के सफल संचालन के लिए संघ, राज्य और स्थानीय सरकार के स्तर पर विभिन्न विभागों में पूरे सरकार की सहभागिता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार एनटीए के पास अत्यंत महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है और उसे अनेक हितधारकों के साथ समन्वय का कार्य भी संभालना पड़ता है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) लगातार विकसित हो रहा है और इसके संगठनात्मक ढांचे को इस प्रकार अंतिम रूप दिया जा सकता है कि एनटीए के संसाधन और जवाबदेही संरचनाएं उन उत्तरदायित्वों के अनुरूप हों जो इसे सौंपे गए हैं। ऐसा करते हुए, विभाग एक उपयुक्त संसदीय ढांचा लागू कर सकता है जो संसद के प्रति एनटीए की जवाबदेही सुनिश्चित करे। 10.2 समिति नोट करती है कि प्रश्न बैंकों में निवेश लंबी अवधि में पेपर लीक के विरुद्ध सबसे व्यावहारिक सुरक्षा उपाय है। प्रश्नों के एक ही सेट का बार-बार उपयोग या परीक्षकों द्वारा हर साल नए प्रश्न पत्र तैयार करवाने की प्रथा परीक्षा प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा के लिए एक जोखिम हो सकती है। इसलिए, समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को एक बड़े, विविध और निरंतर अद्यतन होने वाले प्रश्न बैंक के निर्माण में निवेश करना चाहिए, जिससे प्रश्न-सेटरों की अग्रिम जानकारी के बिना प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए प्रश्न लिए जा सकें। समिति नोट करती है कि सीबीटी प्रारूप में, प्रश्न पत्रों को अब मुद्रित करने और परीक्षा केंद्रों तक ले जाने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, प्रश्न पत्रों को काफी समय पहले से तैयार करने की कोई बाध्यता नहीं है। तदनुसार, अंतिम प्रश्न पत्र परीक्षा के समय के बहुत करीब तैयार किए जाने चाहिए, जिसमें डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके प्रश्न बैंक से प्रश्न लिए जाएं और विशेषज्ञों द्वारा केवल उनका परीक्षण किया जाए। अंत में, समिति परीक्षा के समापन तक अंतिम प्रश्न-परीक्षकों को सख्त एकांतवास और पृथक्करण में रखने पर जोर देती है। समिति आगे सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अपने प्रश्न बैंकों को विकसित करने और अनुवाद के लिए हमारे सबसे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों - जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रबंध संस्थान आदि शामिल हैं - के प्रामाणिक विशेषज्ञों पर भरोसा करना चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को इन विशेषज्ञों को भर्ती करने से पहले उनकी सत्यनिष्ठा स्थापित करने और किसी भी हित के टकराव (जैसे, निजी कोचिंग केंद्रों के मालिक या संकाय, परीक्षा देने वाले परिवार के सदस्य आदि) को खारिज करने के लिए उनके पिछले रिकॉर्ड की जाँच करने की एक प्रणाली भी विकसित करनी चाहिए। 10.3 केवल प्रक्रियाएँ ही नहीं, बल्कि संस्थागत कार्य-संस्कृति भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण होती है। इसलिए समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को ऐसी संस्थागत कार्य-संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जिसमें महानिदेशक से लेकर परीक्षा केंद्र के कक्ष निरीक्षक तक प्रत्येक अधिकारी स्वयं को केवल प्रशासनिक व्यवस्था का एक कर्मचारी न मानकर, बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा का संरक्षक समझे। समिति नोट करती है कि हालिया चुनौतियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में जनता के विश्वास को प्रभावित किया है, और इस विश्वास को फिर से बनाने के लिए हितधारकों के साथ निरंतर, पारदर्शी और द्वि-मार्गी संचार की आवश्यकता होगी। समिति नोट करती है कि उम्मीदवारों के साथ एनटीए की वर्तमान सहभागिता काफी हद तक पोर्टलों और अधिसूचनाओं के माध्यम से एकतरफा संचार तक ही सीमित है। यह नोट करती है कि छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए एनटीए के चैनलों को लेकर अधिक सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता है। समिति सिफारिश करती है कि ऐसे चैनलों को एनटीए के सामान्य कामकाज में शामिल किया जाए और छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए, ताकि यह एजेंसी हितधारकों की चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बन सके। 10.4 समिति 2024 से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा किए गए उपायों को नोट करती है। एसएलसीसी, डीएलसीसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल जैमर तथा एआई आधारित सीसीटीवी विश्लेषण सहित संस्थागत ढांचे का स्वागत है। तथापि, इन सभी उपायों के बावजूद नीट (स्नातक) 2026 परीक्षा का निरस्त किया जाना और अधिक प्रक्रियागत और संस्थागत सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। 10.5 समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 अधिकारी वर्तमान में पदस्थ हैं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रतिनियुक्ति पर हैं - 41 प्रतिशत पद रिक्त है। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मजबूत करने के लिए जनशक्ति की भर्ती डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की प्रमुख सिफारिशों में शामिल थी। समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में जनशक्ति की कमी को नोट करती है और एजेंसी से सभी स्वीकृत पदों पर भर्ती में तेजी लाने का आग्रह करती है। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में विद्यमान सभी 39 स्थायी पद वर्तमान में प्रतिनियुक्ति मोड के माध्यम से भरे गए हैं। प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी आमतौर पर अपने मूल काडर में लौटने से पहले दो से तीन साल के सीमित कार्यकाल के लिए सेवा देते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए काफी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है जो आमतौर पर कई वर्षों के अनुभव से विकसित होती है। तदनुसार, इस उद्देश्य के लिए पेशेवर कर्मचारियों के एक समर्पित काडर की आवश्यकता है। समिति सिफारिश करती है कि इसलिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को स्थायी आधार पर अपने अधिकारियों की भर्ती करनी चाहिए, जिसमें साइकोमेट्रिक्स, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल अवसंरचना, डाटा एनालिटिक्स और परीक्षा रसद के विशेषज्ञों पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के अंतर्गत 16 पदों को वरिष्ठ नेतृत्व की एक पूरक परत के रूप में माना जाना चाहिए, न कि डोमेन विशेषज्ञता के विकल्प के रूप में। 10.6 समिति समुक्ति करती है कि एनटीए द्वारा आयोजित की जाने वाली सीबीटी परीक्षाओं के लिए सुरक्षित सरकारी सीबीटी केंद्रों की एक ठोस कार्यान्वयन योजना, जिसमें बजटीय प्रावधान और मौजूदा सरकारी स्वामित्व वाली सुविधाओं का वर्तमान मानचित्रण शामिल है, को शीघ्रता से अंतिम रूप दिए जाने की आवश्यकता है। समिति का यह विचार है कि पर्याप्त सरकारी स्वामित्व वाला बुनियादी ढाँचा उपलब्ध होना चाहिए ताकि निजी केंद्रों पर निर्भरता से बचा जा सके। 10.7 समिति कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड में चरणबद्ध परिवर्तन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई सिफारिशों को नोट करती है, और व्यापक रूप से इस दृष्टिकोण से सहमत है। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली अधिकांश प्रवेश परीक्षाएं पहले से ही कम्प्यूटर आधारित परीक्षण पर संचालित की जा रही हैं, जिनमें जेईई-मेन्स, यूजीसी-नेट और सीयूईटी शामिल हैं। समिति नोट करती है कि डिजिटल साक्षरता एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक और व्यावसायिक कौशल है जो छात्र आबादी के बीच तेजी से प्रचलित हो रहा है। समिति नोट करती है कि पेन-और-पेपर परीक्षण पर अपनी निर्भरता में नीट-यूजी एक अपवाद है। इसलिए समिति सिफ़ारिश करती है कि युद्ध स्तर पर नीट को भी कम्प्यूटर आधारित परीक्षण दृष्टिकोण में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। हालांकि, समिति दूरस्थ क्षेत्रों और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए कम्प्यूटर आधारित परीक्षण की पहुंच को लेकर चिंतित है। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि कम्प्यूटर आधारित परीक्षण में बदलाव के साथ डिजिटल पहुंच को अधिकतम करने के लिए एक ठोस राष्ट्रीय परीक्षण रणनीति होनी चाहिए। इस रणनीति की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हो सकती हैं - i. नीट (स्नातक) परीक्षा को कम्प्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में परिवर्तित करने से पूर्व पूरे देश में, विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के स्वामित्व वाले कम्प्यूटर आधारित परीक्षा अवसंरचना के विकास हेतु पर्याप्त निवेश किया जाना चाहिए। परीक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित 1,000 सुरक्षित सरकारी कम्प्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों की स्थापना एक स्पष्ट एवं चरणबद्ध समय-सीमा के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति सुझाव देती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी स्वयं देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में मध्यम आकार की सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं (100-200 नोड्स) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करे। जब तक स्कूल/कॉलेज प्रशासन सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के लिए स्थान प्रदान करता है, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी इस शर्त पर आवश्यक हार्डवेयर उपकरणों में निवेश कर सकती है कि आवश्यक किसी भी परीक्षा के संचालन के लिए ये सुविधाएं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को सौंपी जाएंगी। ii. समिति इस बात पर बल देती है कि छात्रों पर परिवहन और आवास के तनाव तथा वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सभी परीक्षाओं के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम 1 परीक्षण केंद्र होना चाहिए। iii. समिति नोट करती है कि उप-अनुबंधित आधार पर परीक्षा केंद्रों के रूप में जुड़े निजी संस्थान प्रायः परीक्षा सुरक्षा में एक कमजोर कड़ी साबित हुए हैं। इसलिए, सभी केंद्र संघ और/या राज्य सरकारों के स्वामित्व और संचालन में होने चाहिए। iv. छात्रों को प्रारूप और डिजिटल इंटरफ़ेस से खुद को परिचित कराने में सक्षम बनाने के लिए कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मॉक परीक्षा देने के अवसर भी दिए जाने चाहिए। v. शिक्षा मंत्रालय छात्रों के बीच डिजिटल परीक्षण से परिचित कराने के लिए स्कूल स्तर पर भी सीबीटी आधारित परीक्षाओं को शामिल करने पर विचार कर सकता है। vi. कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड लागू करने से पहले, जहां कम्प्यूटर और/अथवा कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता के कारण बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है, उन स्थानों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को एक हाइब्रिड मॉडल पर विचार करना चाहिए, जिसके अंतर्गत एनक्रिप्टेड प्रश्न सीधे परीक्षा केंद्र पर पहुंचाए जा सकते हैं और फिर वहीं प्रिंट किए जा सकते हैं, जिसके बारे में समिति को सूचित किया गया है कि पूर्ण कम्प्यूटर आधारित परीक्षण की तैयारी हासिल होने तक यह संभव है। vii. कम्प्यूटर आधारित परीक्षण-आधारित नीट (यूजी) परीक्षा की बहु-सत्र प्रकृति के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से लेखापरीक्षित समानीकरण कार्यप्रणाली की आवश्यकता होगी। कम्प्यूटर आधारित परीक्षण में किसी भी परिवर्तन से पहले इस समानीकरण कार्यप्रणाली को विकसित किया जाना चाहिए और जनता को समझाया जाना चाहिए। viii. नीट (यूजी) को कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड में स्थानांतरित करने में हितधारकों अर्थात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चिकित्सा शिक्षा नियामकों, छात्रों और उनके परिवारों के साथ परामर्श शामिल होना चाहिए।
10.8 समिति के समक्ष परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित दो व्यावहारिक चिंताएँ प्रस्तुत की गईं, जिनको समिति ने नोट किया है: i. परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने एवं अन्य सत्यापन संबंधी औपचारिकताएँ पूरी किए जाने से उन विद्यार्थियों का ध्यान भंग होता है, जो सीमित समय में प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास कर रहे होते हैं। इसलिए समिति का विचार है कि ऐसी सभी औपचारिकताओं के लिए परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व अथवा परीक्षा समाप्त होने के पश्चात 15 मिनट की पृथक समयावधि निर्धारित की जानी चाहिए तथा इन्हें परीक्षा की निर्धारित अवधि के दौरान नहीं किया जाना चाहिए। ii. परीक्षा केंद्र पर कुछ मिनट की देरी से पहुँचने वाले अभ्यर्थियों को प्रायः पूर्णतः प्रवेश से वंचित कर या जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पूरे वर्ष की मेहनत केवल मामूली विलंब के कारण व्यर्थ होती है। समिति समुक्ति करती है कि कुछ परिस्थितियों में अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र पर विलंब से पहुँचने के वास्तविक एवं उचित कारण हो सकते हैं। इसलिए समिति का विचार है कि कुछ तंत्र बनाए जाने चाहिए कि ऐसे अभ्यर्थियों को विलंब से पहुँचने का कारण अभिलेखित करते हुए एक वचन-पत्र पर हस्ताक्षर कराने के उपरांत परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्हें केवल शेष उपलब्ध समय के लिए ही परीक्षा देने की अनुमति दी जाए तथा किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त समय प्रदान न किया जाए। 10.9 समिति नोट करती है कि परीक्षा के दिन आयोजित होने वाली सार्वजनिक रैलियाँ, जुलूस अथवा अन्य बड़े सार्वजनिक आयोजन अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुँचने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें निर्धारित रिपोर्टिंग समय तक पहुँचने में विलंब हो सकता है। समिति सिफारिश करती है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में आवश्यक संशोधन कर जिला प्रशासन को यह निर्देश देने का प्रावधान किया जाए कि परीक्षा के दिनों में किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस अथवा अन्य सार्वजनिक सभा के आयोजन की अनुमति न दी जाए। साथ ही, परीक्षा के दिनों में सुचारु यातायात व्यवस्था एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त एवं अग्रिम व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि किसी भी अभ्यर्थी को टाली जा सकने वाली बाहरी परिस्थितियों के कारण किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। 10.10 समिति नोट करती है कि वर्तमान में नीट (स्नातक) के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष तथा नर्सिंग पाठ्यक्रमों में उपलब्ध कुल सीटों की तुलना में कहीं अधिक अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है। यद्यपि पर्याप्त संख्या में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का होना परामर्श के विभिन्न चरणों तथा निजी एवं मानद संस्थानों की सीटों के माध्यम से विद्यार्थियों को अवसर प्रदान करने की दृष्टि से उचित है, तथापि उपलब्ध सीटों और उत्तीर्ण घोषित अभ्यर्थियों की संख्या के बीच अत्यधिक अंतर लाखों विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव उत्पन्न करता है। इसलिए समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को अर्हता प्रतिशतक (क्वालिफ़ाइंग परसेंटाइल) एवं कट-ऑफ निर्धारित करने की वर्तमान पद्धति की वर्षवार, आँकड़ा-आधारित समीक्षा करनी चाहिए, ताकि योग्यता से कोई समझौता किए बिना उत्तीर्ण घोषित अभ्यर्थियों की संख्या को उपलब्ध वास्तविक सीटों के अनुरूप यथोचित सीमा तक संतुलित रखा जा सके। 10.11 समिति
यह जानकारी Press Information Bureau की आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित है। मूल दस्तावेज़ और पूरा संदर्भ नीचे दिए गए स्रोत लिंक पर पढ़ा जा सकता है।