शेख हसीना को शरण देने के फैसले पर बोले दिनेश त्रिवेदी, भारत के पास नहीं था कोई अन्य विकल्प
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के मामले पर दिनेश त्रिवेदी ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि उस समय भारत के सामने इसके अलावा शायद ही कोई दूसरा रास्ता बचा था। त्रिवेदी ने भारत और बांग्लादेश के बीच के संबंधों को केवल व्यापारिक हितों से ऊपर बताते हुए दोनों देशों के बीच गहरे और व्यापक रिश्तों पर विशेष जोर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVबांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के मुद्दे पर चर्चा करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि उस स्थिति में भारत के पास शायद ही कोई अन्य विकल्प मौजूद था। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस फैसले को परिस्थितियों के अनुरूप बताया है।
त्रिवेदी ने भारत और बांग्लादेश के बीच के संबंधों को केवल लेन-देन या व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं माना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच के रिश्ते इन संकीर्ण दायरों से कहीं अधिक गहरे और व्यापक हैं।
उन्होंने दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लिए बांग्लादेश के साथ संबंधों का महत्व बहुत अधिक है। उनके अनुसार, यह रिश्ता आपसी विश्वास और सहयोग पर टिका हुआ है।
शेख हसीना को शरण देने के भारत के फैसले को लेकर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से उस समय यही सबसे उचित कदम प्रतीत हो रहा था।
त्रिवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने का पक्षधर रहा है। बांग्लादेश के साथ भारत की साझेदारी को उन्होंने भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण बताया है।
उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच के व्यापक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच का यह जुड़ाव आने वाले समय में और अधिक प्रगाढ़ होने की संभावना है।
अंत में, उन्होंने दोहराया कि शेख हसीना को शरण देने का निर्णय उस समय की अनिवार्यताओं को देखते हुए लिया गया था। भारत ने अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए यह कदम उठाया था।