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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: इस वर्ष चार सितंबर को गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय एक साथ मनाएंगे जन्माष्टमी का पर्व

इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव चार सितंबर को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के विशेष संयोग के कारण वैष्णव और रामानंदी समेत सभी प्रमुख संप्रदायों के बीच इसी दिन उत्सव मनाने पर आम सहमति बनी है। यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिससे इस वर्ष जन्माष्टमी का आयोजन एक ही दिन संपन्न होगा।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। देश भर में गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लोग चार सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। आमतौर पर तिथियों के अंतर के कारण अलग-अलग दिन उत्सव मनाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार स्थिति भिन्न है।

इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इन दोनों का एक साथ होना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण से सभी प्रमुख संप्रदायों ने एक ही दिन उत्सव मनाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

वैष्णव और रामानंदी संप्रदाय के अनुयायी भी इस बार चार सितंबर को ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। संप्रदायों के बीच बनी यह सहमति भक्तों के लिए एक सुखद संयोग है। इससे पूरे देश में एक साथ भक्ति का माहौल देखने को मिलेगा।

धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष स्थान है। जब अष्टमी तिथि के साथ यह नक्षत्र मिलता है, तो इसे भगवान के प्राकट्य के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इस बार यह संयोग चार सितंबर को पूर्ण रूप से बन रहा है।

मंदिरों और घरों में इस विशेष दिन की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। भक्त अपने आराध्य के स्वागत के लिए उत्साहित हैं। एक ही दिन उत्सव होने से सामूहिक आयोजन और भी भव्य होने की संभावना है।

विभिन्न संप्रदायों के प्रमुखों ने भी इस तिथि को लेकर अपनी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि शास्त्र सम्मत निर्णय के आधार पर ही चार सितंबर को जन्माष्टमी का निर्धारण किया गया है।

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संप्रदायों के बीच एकता का संदेश भी देता है। सभी भक्त अब चार सितंबर की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि वे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗