श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनेगी जन्माष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर चार सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। भक्त इस विशेष संयोग में कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं।
VIMARSHNAARAD TVइस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनाया जा रहा है। पंचांग की गणना के अनुसार, यह शुभ अवसर शुक्रवार को पड़ रहा है, जिससे भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी का होना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पंचांग के विवरण के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ तीन सितंबर की रात 2:25 बजे से हो रहा है। यह तिथि चार सितंबर की रात 12:13 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस समय सीमा के भीतर ही भक्त अपने आराध्य का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाएंगे। मंदिरों और घरों में विशेष सजावट की जा रही है ताकि कान्हा के स्वागत में कोई कमी न रहे।
जन्माष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात के समय भगवान के जन्म की प्रतीक्षा करते हैं। रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार इस पर्व की दिव्यता को और अधिक बढ़ा रहा है। भक्त इस दुर्लभ अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन की तैयारी कर रहे हैं।
कानपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में कान्हा की पोशाक, मुकुट, बांसुरी और झूलों की बिक्री बढ़ गई है। लोग अपने घरों को फूलों और रोशनी से सजा रहे हैं। मंदिरों में भी विशेष झांकियां तैयार की जा रही हैं, जो भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाएंगी।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी का व्रत रखने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण करना और उनकी भक्ति में लीन होना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। लोग इस दिन दान-पुण्य के कार्य भी करते हैं और गरीबों को भोजन कराते हैं।
जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में मध्यरात्रि के समय शंखनाद और घंटियों की गूंज के साथ भगवान कृष्ण का जन्म मनाया जाएगा। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम होगा। भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने प्रिय कान्हा के जन्मोत्सव का साक्षी बन सकें।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश भी देता है। रोहिणी नक्षत्र के इस दुर्लभ संयोग में मनाया जाने वाला यह जन्मोत्सव सभी के लिए सुख और समृद्धि लाने वाला माना जा रहा है।