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संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार पर लगाया दस लाख रुपये का जुर्माना

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के दौरान मुल्ला अफ़रोज़ की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने अफ़रोज़ को गलत तरीके से हिरासत में लेने के लिए योगी सरकार पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस घटनाक्रम में हिंसा के दौरान चार लोगों की जान भी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने करीब दो महीने बाद अफ़रोज़ को पकड़ा था।

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मुल्ला अफ़रोज़ की गिरफ्तारी को अनुचित करार देते हुए राज्य सरकार पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला संभल में हुई उस हिंसा से जुड़ा है जिसमें चार व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी।

न्यायालय ने इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि अदालत ने अफ़रोज़ की गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उसके आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगे हैं।

बीबीसी न्यूज़ हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, संभल में हुए हिंसक उपद्रव के दौरान चार लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ था। पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान मुल्ला अफ़रोज़ को मुख्य संदिग्धों में से एक माना था।

अफ़रोज़ की गिरफ्तारी घटना के लगभग 54 दिनों के बाद जनवरी 2025 में की गई थी। इतने लंबे समय तक चली जांच और उसके बाद हुई गिरफ्तारी के तरीके को लेकर अब कानूनी स्तर पर चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कड़ा फैसला सुनाया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी होगी। दस लाख रुपये का जुर्माना लगाने का उद्देश्य गलत गिरफ्तारी से हुए नुकसान की भरपाई करना और प्रशासन को भविष्य में सतर्क रहने का संदेश देना है।

यह घटना उत्तर प्रदेश के कानून-व्यवस्था के संदर्भ में काफी चर्चा में रही है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

संभल हिंसा के बाद से ही स्थानीय स्तर पर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में अफ़रोज़ की भूमिका को लेकर जो तर्क दिए थे, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। अब इस जुर्माने के बाद मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗