संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर का संबोधन, वैश्विक चुनौतियों और भारत की प्रगति पर जोर
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर सदस्य देश को अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। जयशंकर ने भारत की समावेशी विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की प्रगति ने दुनिया की एक-छठी आबादी के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीदें जगाई हैं।
VIMARSHNAARAD TVसंयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में हर सदस्य देश को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है कि वे वैश्विक चुनौतियों के समाधान में क्या योगदान दे सकते हैं।
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की विकास गाथा को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि भारत की समावेशी विकास की नीति और सर्वांगीण प्रगति ने न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश दिया है।
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्रगति ने दुनिया की लगभग एक-छठी आबादी के लिए बेहतर भविष्य की नई उम्मीदें पैदा की हैं। उन्होंने भारत के प्रयासों को वैश्विक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी जयशंकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने वैश्विक मंच से आतंकवाद के खिलाफ अपनी बात मजबूती से रखी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस खतरे के प्रति सचेत रहने का आह्वान किया।
जयशंकर का यह भाषण ऐसे समय में आया है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा से ही सहयोग और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रहा है।
अंत में, उन्होंने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उनके संबोधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।