संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए ब्रिक्स मंच से प्रधानमंत्री मोदी की जोरदार पैरवी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दा मजबूती से उठाया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत लंबे समय से इस वैश्विक मंच पर अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत है। ऐतिहासिक संदर्भों को याद करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि अतीत में भारत को सुरक्षा परिषद में शामिल करने के लिए वैश्विक शक्तियों ने प्रयास किए थे, जो अब एक नई दिशा ले रहे हैं।
VIMARSHNAARAD TVब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से रखा है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लंबे समय से वैश्विक निर्णय लेने वाली इस सर्वोच्च संस्था में अपनी जगह पक्की करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
रिपोर्ट में ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए बताया गया है कि एक दौर ऐसा भी था जब दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियां भारत को सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाने के लिए उत्सुक थीं। हालांकि, उस समय की परिस्थितियों और निर्णयों के कारण यह संभव नहीं हो सका था।
वर्तमान में भारत की दावेदारी को लेकर वैश्विक परिदृश्य बदलता हुआ नजर आ रहा है। ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत की बढ़ती सक्रियता और कूटनीतिक प्रभाव को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को और अधिक बल मिल रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब अपनी शर्तों और वैश्विक सहयोगियों के साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सुरक्षा परिषद में भारत की भागीदारी को लेकर रूस और चीन जैसे देशों के रुख में आए बदलावों पर भी चर्चा की जा रही है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह कूटनीतिक बदलाव भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
भारत का तर्क है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के रूप में उसे वैश्विक सुरक्षा और शांति के निर्णयों में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह मांग अब केवल भारत की नहीं, बल्कि कई अन्य देशों द्वारा भी समर्थित की जा रही है।
आने वाले समय में ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की यह हुंकार सुरक्षा परिषद के ढांचे में बदलाव की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।