सहारनपुर: मस्जिद के नीचे मिले 250 साल पुराने कुएं की एएसआई टीम ने की गहन जांच
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद गिराए जाने के बाद जमीन के नीचे एक प्राचीन कुआं मिला है। लखनऊ से आई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर इस कुएं की आंतरिक संरचना और ईंटों का बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने करीब 15 मिनट तक कुएं के भीतर उतरकर इसकी ऐतिहासिकता को समझने का प्रयास किया है।
VIMARSHNAARAD TVसहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद को हटाए जाने के बाद जमीन के भीतर एक पुराना कुआं दिखाई दिया। इस खोज के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सूचित किया था। सोमवार को लखनऊ से एएसआई की एक विशेष टीम सहारनपुर पहुंची ताकि इस संरचना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगाया जा सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कुआं लगभग 250 साल पुराना माना जा रहा है। एएसआई के विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर कुएं की बनावट और उसमें इस्तेमाल की गई ईंटों का विस्तृत अध्ययन किया। टीम के सदस्यों ने कुएं के अंदर उतरकर करीब 15 मिनट तक इसकी आंतरिक स्थिति की जांच की।
इस दौरान विशेषज्ञों ने कुएं की दीवारों और निर्माण शैली को बारीकी से देखा ताकि यह समझा जा सके कि यह किस कालखंड का है। स्थानीय स्तर पर इस कुएं के मिलने से काफी चर्चाएं हो रही हैं। एएसआई की टीम ने अपनी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नोट किया है।
फिलहाल, एएसआई की ओर से इस जांच के नतीजों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह कुआं मस्जिद के नीचे दबा हुआ था, जिसे ध्वस्तीकरण के बाद देखा गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि एएसआई की रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन कुएं के संरक्षण या भविष्य को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा। तब तक के लिए स्थल की सुरक्षा और निगरानी पर ध्यान दिया जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में हुई इस खोज को लेकर अब सभी की निगाहें एएसआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
एएसआई की टीम ने अपनी जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवश्यक डेटा एकत्र कर लिया है। इस मामले में किसी भी प्रकार की अटकलों से बचने के लिए आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना ही उचित माना जा रहा है।