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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामला: मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, सरकार को बनाया पक्षकार

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित सौ वर्ष से अधिक पुरानी मस्जिद को प्रशासन द्वारा गिराए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई के विरोध में राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब मस्जिद के मुतव्वली तनवीर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है, जिसमें राज्य सरकार को विपक्षी के रूप में नामित किया गया है।

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट के भीतर मौजूद एक सदी से भी अधिक पुरानी मस्जिद को प्रशासन द्वारा ढहाए जाने का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है और विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में काफी चर्चाएं हैं।

विवाद को देखते हुए मस्जिद प्रबंधन समिति ने न्याय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया है। मुतव्वली तनवीर की ओर से अदालत में एक रिट याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में राज्य सरकार को विपक्षी पार्टी बनाया गया है, जिससे यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हो गया है।

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद से ही सहारनपुर में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। विपक्षी नेताओं ने इस कदम की आलोचना की है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, यह मस्जिद कलेक्ट्रेट परिसर का एक पुराना हिस्सा थी। इसके अचानक गिराए जाने के बाद से ही प्रबंधन समिति ने इसे अनुचित बताते हुए कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया। याचिका में मस्जिद की ऐतिहासिकता और उससे जुड़ी भावनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है।

फिलहाल, कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आने का इंतजार है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अदालत के समक्ष अपना क्या पक्ष रखती है। सहारनपुर के लोग और स्थानीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

इस मामले ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि धार्मिक स्थलों के संरक्षण और प्रशासन की कार्रवाई के बीच के संतुलन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के बाद अब यह मामला पूरी तरह से कानूनी बहस का विषय बन चुका है।

आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर आगे की कानूनी स्थिति क्या होगी। तब तक, सहारनपुर में स्थिति को लेकर सतर्कता बरती जा रही है और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗