सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, सरगना सहित पांच सदस्य गिरफ्तार
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना उपकार लूथरा वर्ष 2001 से इस अवैध धंधे में शामिल था। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि एक सिक्के को बनाने में पांच रुपये की लागत आती थी और इसे 25 रुपये में बेचकर 400 प्रतिशत का कमीशन कमाया जाता था।
VIMARSHNAARAD TVसहारनपुर में नकली मुद्रा के बाद अब नकली सिक्के बनाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो लंबे समय से नकली सिक्के बाजार में खपा रहा था। इस कार्रवाई में गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा, जिसे अभय प्रताप सिंह के नाम से भी जाना जाता है, वर्ष 2001 से ही नकली सिक्के बनाने के काम में लिप्त था।
आरोपियों ने बताया कि एक नकली सिक्के को तैयार करने में उनकी लागत मात्र पांच रुपये आती थी। इसके बाद वे इन सिक्कों को 25 रुपये की दर से बाजार में बेचते थे। इस तरह वे प्रत्येक सिक्के पर 400 प्रतिशत का भारी कमीशन कमा रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और बाजार में नकली सिक्कों की भारी खेप उतार चुका था। गिरफ्तार किए गए सदस्यों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य संपर्कों की तलाश कर रही है।
नकली सिक्कों के प्रचलन से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, जिसे देखते हुए पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य साथियों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।
इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि ये नकली सिक्के किन-किन क्षेत्रों में और किस माध्यम से खपाए गए थे।
गिरोह के सरगना का लंबा आपराधिक इतिहास पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हो रहा है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का दावा कर रही है।