सीएम योगी का जनता दर्शन: बहन की बीमारी से परेशान भाई की गुहार पर भावुक हुए मुख्यमंत्री
लखनऊ में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने अपनी बहन की गंभीर बीमारी और इलाज में आ रही दिक्कतों के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया। फरियादी की व्यथा सुनकर मुख्यमंत्री भावुक हो गए और उन्होंने तुरंत पीड़िता को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने परिवार को हर संभव आर्थिक सहायता का भरोसा भी दिलाया है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान आम जनता की समस्याएं सुनीं। इस दौरान एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बहन की खराब सेहत का मुद्दा उठाया। उसने बताया कि उसकी बहन गंभीर रूप से बीमार है और परिवार इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ है।
फरियादी की आपबीती सुनकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़िता को तत्काल प्रभाव से लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया जाए और उसके इलाज की समुचित व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि इलाज में कोई कमी न रहे।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इलाज के लिए हर संभव मदद करेगी ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। जनता दर्शन में मौजूद अधिकारियों को इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनता दर्शन कार्यक्रम में केवल यही मामला नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री का यह मानवीय रुख वहां मौजूद लोगों के लिए राहत लेकर आया। योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जरूरतमंदों के इलाज के लिए प्रतिबद्ध है और किसी को भी इलाज के अभाव में परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जनता दर्शन में आने वाले सभी आवेदनों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करें। मुख्यमंत्री का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।