सोनीपत में पिटबुल कुत्ते का छह महीने के बच्चे पर हमला, भारत में खतरनाक नस्लों को लेकर क्या हैं नियम
हरियाणा के सोनीपत में एक पालतू पिटबुल कुत्ते ने छह महीने के मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया। इस घटना में बच्चे को बचाने की कोशिश कर रही उसकी बुआ भी जख्मी हो गई हैं। इस दर्दनाक वाकये के बाद देश में खतरनाक कुत्तों की नस्लों को पालने और उनके प्रबंधन से जुड़े नियमों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
VIMARSHNAARAD TVहरियाणा के सोनीपत स्थित सिक्का कॉलोनी में 14 सितंबर की शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहाँ एक पड़ोसी के पालतू पिटबुल कुत्ते ने छह महीने के एक छोटे बच्चे पर अचानक हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब बच्चा अपने घर के पास मौजूद था। पिटबुल की आक्रामकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमले के दौरान बच्चे को बचाने के लिए आगे आईं उसकी बुआ भी गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना पालतू जानवरों की सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग पालतू कुत्तों को लेकर प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। पिटबुल जैसी नस्लों को दुनिया भर में उनकी आक्रामकता के लिए जाना जाता है, जिसके कारण कई देशों में इन्हें पालने पर कड़े प्रतिबंध या विशेष नियम लागू हैं। भारत में भी समय-समय पर खतरनाक कुत्तों के हमलों के बाद इनके रखरखाव को लेकर चर्चाएं तेज होती रही हैं।
भारत में खतरनाक कुत्तों की नस्लों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में दिशा-निर्देश जारी किए थे। पशुपालन और डेयरी विभाग ने राज्यों को सलाह दी थी कि वे पिटबुल टेरियर, अमेरिकन बुलडॉग और रॉटवीलर जैसी आक्रामक नस्लों के आयात, प्रजनन और बिक्री पर रोक लगाएं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले हमलों को रोकना और पालतू जानवरों के मालिकों की जवाबदेही तय करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिटबुल जैसे कुत्तों को पालने के लिए विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षात्मक उपायों की आवश्यकता होती है। यदि मालिक इन सावधानियों को नजरअंदाज करते हैं, तो परिणाम घातक हो सकते हैं। सोनीपत की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पालतू जानवरों के व्यवहार को लेकर लापरवाही बरतने का खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ता है।
फिलहाल, घायल बच्चे और उसकी बुआ का इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या कुत्ते के मालिक ने नियमों का पालन किया था या नहीं। इस घटना ने समाज में एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या घनी आबादी वाले इलाकों में खतरनाक नस्लों के कुत्तों को पालने की अनुमति दी जानी चाहिए।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी पालतू जानवर के हमले से किसी को चोट पहुंचती है, तो मालिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसमें लापरवाही बरतने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप शामिल हो सकते हैं।
यह घटना न केवल पीड़ित परिवार के लिए एक त्रासदी है, बल्कि अन्य पालतू पशु मालिकों के लिए भी एक चेतावनी है। सुरक्षा मानकों का पालन करना और अपने जानवरों को नियंत्रित रखना हर मालिक का प्राथमिक कर्तव्य है।