ताज़ा अपडेटस्टील स्लैग तकनीक से बनी सड़कें: निर्माण लागत में 40 प्रतिशत की कमी और चार गुना अधिक मजबूती
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स्टील स्लैग तकनीक से बनी सड़कें: निर्माण लागत में 40 प्रतिशत की कमी और चार गुना अधिक मजबूती

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि स्वदेशी स्टील स्लैग तकनीक से बनी सड़कें निर्माण लागत को 40 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। यह तकनीक पारंपरिक सड़कों की तुलना में चार गुना अधिक मजबूत है और लगभग 15 वर्षों तक रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी सड़क ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, और अब ओडिशा में 40 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना है।

स्टील स्लैग तकनीक से बनी सड़कें: निर्माण लागत में 40 प्रतिशत की कमी और चार गुना अधिक मजबूती
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में स्टील स्लैग रोड तकनीक के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह स्वदेशी नवाचार सड़क निर्माण की लागत में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। इसके अलावा, यह तकनीक पारंपरिक सड़कों के मुकाबले चार गुना अधिक मजबूती प्रदान करती है, जिससे सड़कों का जीवनकाल बढ़ जाता है और लगभग 15 वर्षों तक बड़े रखरखाव की आवश्यकता नहीं पड़ती।

यह तकनीक औद्योगिक कचरे को बुनियादी ढांचे की संपत्ति में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। डॉ. सिंह ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वेस्ट टू वेल्थ' दृष्टिकोण का हिस्सा बताया। उन्होंने सरकारी विभागों, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र से इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने का आग्रह किया ताकि इसे एक परियोजना से कई राज्यों तक विस्तारित किया जा सके।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 1.85 किलोमीटर लंबी स्टील स्लैग सड़क के निर्माण ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। यह उपलब्धि सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और जिंदल स्टील लिमिटेड के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए और 'स्टील ग्रिट' ब्रांड का शुभारंभ भी किया गया।

डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे भौगोलिक रूप से विविध देश में, जहां भारी बारिश और कठिन इलाके सड़क निर्माण के लिए चुनौती पेश करते हैं, यह तकनीक बेहद उपयोगी है। उन्होंने ग्रामीण सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव का भी उल्लेख किया, जहां अब भारी व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है, जिसके लिए अधिक टिकाऊ सड़कों की आवश्यकता है।

इस तकनीक का उपयोग पहले ही हजीरा, मुंबई-गोवा राजमार्ग और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में किया जा चुका है। ये परियोजनाएं साबित करती हैं कि प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स कठिन औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स वातावरण की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। यह नवाचार प्राकृतिक संसाधनों, जैसे माइनिंग और क्वारींग से प्राप्त एग्रीगेट्स के संरक्षण में भी मदद करता है।

सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने घोषणा की कि अब इस तकनीक को और बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। जिंदल स्टील के ओडिशा स्थित अंगुल प्लांट से 40 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह आगामी परियोजना वर्तमान गिनीज रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए इस तकनीक के व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।

अंत में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पहल विज्ञान, उद्योग और समाज की जरूरतों को एक साथ जोड़ती है। सरकार का लक्ष्य अब इन स्वदेशी तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर मुख्यधारा के बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाना है, ताकि देश को किफायती और पर्यावरण के अनुकूल सड़कें मिल सकें।

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