स्वच्छता उद्यमी योजना से बदली हरीश चंद्र परबत की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
बिहार के सीवान निवासी हरीश चंद्र परबत ने स्वच्छता उद्यमी योजना की मदद से अपनी आजीविका को सुदृढ़ किया है। मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण खरीदने के बाद उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे वे अपने तीनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में सक्षम हुए हैं और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हैं।

बिहार के सीवान जिले के रहने वाले 46 वर्षीय हरीश चंद्र परबत ने स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया है। वर्तमान में गाजियाबाद नगर निगम के तहत साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में स्वच्छता सेवाओं के लिए ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन चलाने वाले श्री परबत की कहानी आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।
वर्ष 2015 में बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली आए श्री परबत ने शुरुआत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसे कठिन कार्यों में अनुभव प्राप्त किया। उस समय उनकी मासिक आय 13,000 से 14,000 रुपये के बीच थी, जिससे परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और बिहार में रह रही अपनी मां की मदद करना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद, श्री परबत ने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने एक ऐसा रोजगार पाने का संकल्प लिया जिससे वे अपने परिवार का स्तर सुधार सकें। नवंबर 2021 में उन्हें स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने लगभग 9.75 लाख रुपये की लागत वाली ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन खरीदी।
इस योजना के तहत उन्हें 6 लाख रुपये से अधिक का ऋण और लगभग 3.68 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। मशीनीकृत उपकरणों के आने से उनके काम करने की क्षमता बढ़ गई और उनकी मासिक आय बढ़कर 40,000 से 45,000 रुपये तक पहुंच गई। इस सुधार ने उन्हें अपने परिवार को दिल्ली बुलाने और बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का अवसर दिया।
आज उनके तीनों बच्चे दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनका बड़ा बेटा स्नातक के अंतिम वर्ष में है, दूसरा बेटा बी.टेक के दूसरे वर्ष में और बेटी बी.टेक के पहले वर्ष में पढ़ाई कर रही है। श्री परबत अपनी मेहनत की कमाई से न केवल बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं, बल्कि ऋण की किश्तें और घर का किराया भी समय पर चुका रहे हैं।
श्री परबत का कहना है कि उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि उनके बच्चों की उच्च शिक्षा है। वे गर्व के साथ बताते हैं कि वे अब आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मई 2026 तक उनकी ऋण राशि काफी कम हो चुकी है।
उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे सरकारी सहायता और मशीनीकृत उपकरण स्वच्छता पेशेवरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। श्री परबत की प्रगति न केवल उनके परिवार के लिए वित्तीय सुरक्षा लेकर आई है, बल्कि उनकी अगली पीढ़ी के लिए भी उज्ज्वल भविष्य के द्वार खोले हैं।
