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स्वामीनारायण संप्रदाय का वह पुराना मामला जब अदालत में हिंदू धर्म से अलग पहचान का दावा किया गया

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वामीनारायण संप्रदाय के एक पुराने कानूनी मामले में संप्रदाय ने अदालत के समक्ष खुद को हिंदू धर्म से अलग बताने का दावा किया था। यह चर्चा तब फिर से सामने आई जब पेरिस के एफिल टॉवर में बीएपीएस संस्था के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को वहां से हटाए जाने की घटना सामने आई।

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़ा एक पुराना कानूनी विवाद चर्चा में है। इस मामले में संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने अदालत में यह तर्क दिया था कि वे हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं हैं। यह कानूनी बहस संप्रदाय की अपनी अलग पहचान और मान्यताओं को लेकर की गई थी।

हाल ही में यह विषय तब फिर से सुर्खियों में आया जब बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी बीएपीएस से जुड़े करीब 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पेरिस में एफिल टॉवर का दौरा किया। इस दौरान वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटा दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने संप्रदाय की कार्यप्रणाली और उनके दृष्टिकोण को लेकर सार्वजनिक चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बीएपीएस संस्था किसी विवाद या चर्चा का केंद्र बनी है।

अदालत में दिए गए पुराने बयानों और हालिया पेरिस दौरे की घटना के बीच लोग संप्रदाय की धार्मिक स्थिति और उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में इन दोनों घटनाओं को जोड़कर संप्रदाय के रुख पर प्रकाश डाला गया है।

संप्रदाय की ओर से समय-समय पर अपनी धार्मिक पहचान को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। अदालत में दिया गया वह पुराना बयान इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जाता है।

पेरिस की घटना के बाद से ही सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर इस पर बहस तेज हो गई है। लोग यह जानने के इच्छुक हैं कि आखिर एक धार्मिक संस्था ने अदालत में ऐसी बात क्यों कही थी।

बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह जानकारी संप्रदाय के पुराने कानूनी दस्तावेजों और हालिया पेरिस दौरे के संदर्भ में सामने आई है। संस्था की ओर से इन विषयों पर समय-समय पर अपनी व्याख्या दी जाती रही है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗