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हरतालिका तीज: 70 साल बाद महाजयंती योग का दुर्लभ संयोग, 14 सितंबर को होगा पूजन

इस वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का पर्व विशेष है, क्योंकि सात दशकों के बाद इस दिन महाजयंती योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। इस बार के महासंयोग को ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हरतालिका तीज का महापर्व इस बार 14 सितंबर को पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष का यह पर्व विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि करीब 70 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस दिन महाजयंती योग का अद्भुत संयोग बन रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं।

ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि महाजयंती योग का बनना इस व्रत के फल को और अधिक बढ़ा देता है। यह दुर्लभ संयोग पूजा और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। महिलाएं इस दिन विशेष मुहूर्त में पूजा करके अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।

हरतालिका तीज का व्रत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग करना होता है। महिलाएं इस दिन नए वस्त्र धारण करती हैं और सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती को समर्पित करती हैं।

इस पर्व का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह वैवाहिक जीवन में अनुकूलता और प्रेम को बढ़ाने का भी प्रतीक है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार के महासंयोग के कारण मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

पूजा के मुहूर्त को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि महिलाएं शुभ समय में ही अनुष्ठान संपन्न कर सकें। महाजयंती योग के कारण इस बार की पूजा का विशेष महत्व बताया जा रहा है।

यह पर्व भारतीय संस्कृति में महिलाओं के समर्पण और आस्था का एक सुंदर उदाहरण है। 14 सितंबर को देशभर में महिलाएं इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखेंगी और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगेंगी।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗