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हरियाणा की डॉ. मोनिया ने वित्तीय चुनौतियों को मात देकर हासिल की डॉक्टरेट की उपाधि

कुरुक्षेत्र की 29 वर्षीय डॉ. मोनिया ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप (एनएफएससी) की मदद से अपनी पीएच.डी. पूरी की है। आर्थिक तंगी और अन्य बाधाओं के बावजूद, उन्होंने नैनो-जैव प्रौद्योगिकी में शोध कार्य पूरा किया। वे अपने परिवार में डॉक्टरेट हासिल करने वाली पहली सदस्य बनी हैं और अब प्रशासनिक सेवाओं व वैज्ञानिक करियर की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

हरियाणा की डॉ. मोनिया ने वित्तीय चुनौतियों को मात देकर हासिल की डॉक्टरेट की उपाधि
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

हरियाणा के कुरुक्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीय डॉ. मोनिया ने हाल ही में अपनी पीएच.डी. की डिग्री हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप (एनएफएससी) ने उनकी इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस सहायता के बिना उनके लिए उच्च शिक्षा का खर्च उठाना बेहद कठिन था।

डॉ. मोनिया का सपना नैनो-जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिक बनकर नवीन अनुसंधान करना है। हालांकि, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उनके शोध के खर्चों को वहन करने में सक्षम नहीं थी। प्रयोगशाला के उपकरणों की मरम्मत, नमूनों की जांच और सम्मेलनों में भाग लेने जैसे खर्चों ने उन पर भारी वित्तीय दबाव बना दिया था।

उन्होंने बताया कि अपने शोध के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें सीमित पर्यवेक्षकीय सहायता और जातिगत भेदभाव जैसी समस्याएं शामिल थीं। इन बाधाओं ने उनके शोध कार्य में देरी की, जिससे उनका संघर्ष और अधिक बढ़ गया। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने वैज्ञानिक बनने के लक्ष्य पर अडिग रहीं।

मार्च 2022 से उन्हें एनएफएससी के तहत वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हुई। उन्हें फेलोशिप भुगतान, मकान किराया भत्ता और आकस्मिक खर्चों के रूप में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई। इस धन ने उन्हें रसायनों की खरीद, शोध-प्रबंध की छपाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए।

इस फेलोशिप के सहयोग से डॉ. मोनिया अपने परिवार में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली व्यक्ति बनीं। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस सहायता ने न केवल उनकी वित्तीय बाधाओं को दूर किया, बल्कि उनके भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार किया है।

वर्तमान में, डॉ. मोनिया यूपीएससी परीक्षाओं, वैज्ञानिक भर्ती और सहायक प्रोफेसर पदों के लिए तैयारी कर रही हैं। वे वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ प्रशासन के क्षेत्र में भी अपना करियर बनाने की इच्छुक हैं। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि सही समय पर मिली फेलोशिप मेधावी छात्रों के लिए किस प्रकार जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है।

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