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हाथरस में करोड़ों की लागत से बने कचरा निस्तारण केंद्र बदहाल, गांवों में अब भी कूड़े का अंबार

हाथरस जिले में गांवों को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से 40 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर बनाए गए कचरा निस्तारण केंद्र देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुके हैं। जिले की 462 ग्राम पंचायतों में से 445 में स्थापित ये केंद्र अब खुद कचरे के ढेर में तब्दील हो गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्वच्छता के नाम पर खर्च की गई एक बड़ी धनराशि का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले की ग्राम पंचायतों को कचरा मुक्त बनाने के लिए आरसीसी यानी कचरा निस्तारण केंद्रों का निर्माण किया गया था। इन केंद्रों पर सरकार ने 40 करोड़ रुपये से अधिक की भारी भरकम राशि व्यय की थी।

आंकड़ों के मुताबिक, हाथरस जिले में कुल 462 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 445 पंचायतों में कचरा निस्तारण केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य गांवों से निकलने वाले कचरे का सही तरीके से निपटान करना था ताकि गंदगी न फैले। हालांकि, वर्तमान स्थिति यह है कि ये केंद्र अपनी उपयोगिता खो चुके हैं।

देखरेख और उचित प्रबंधन के अभाव में ये केंद्र अब खुद कचरे का केंद्र बन गए हैं। जिन स्थानों पर कचरे का निस्तारण होना था, वहां अब कूड़े के ढेर सड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इन केंद्रों की बदहाली ने स्वच्छता मिशन के दावों की पोल खोल दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि इन केंद्रों के निर्माण के बाद से ही इनके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। समय के साथ ये इमारतें जर्जर होती गईं और कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई। इसका सीधा असर गांवों की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर इन केंद्रों के निर्माण के लिए बड़ी योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद गांवों में कचरे की समस्या जस की तस बनी हुई है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन केंद्रों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। यदि समय रहते इनकी मरम्मत और संचालन की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह सरकारी निवेश पूरी तरह व्यर्थ साबित होगा।

फिलहाल, इन केंद्रों के जीर्णोद्धार या इनके भविष्य को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। ग्रामीण अब भी कचरे के निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, हाथरसमूल रिपोर्ट देखें ↗