49 साल पुरानी फिल्म 'मुक्ति' की लोरी आज भी है हर मां की पहली पसंद, मुकेश और लता की आवाज का जादू
साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म 'मुक्ति' का गीत 'लल्ला लल्ला लोरी, दूध की कटोरी' आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश और लता मंगेशकर द्वारा गाई गई यह लोरी आरडी बर्मन के संगीत के साथ भारतीय सिनेमा के सबसे भावुक और सदाबहार गीतों में से एक मानी जाती है। यह गीत आज भी कई माताओं की पहली पसंद बना हुआ है।
VIMARSHNAARAD TVभारतीय सिनेमा में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं से परे जाकर अमर हो जाते हैं। साल 1977 में आई फिल्म 'मुक्ति' की लोरी 'लल्ला लल्ला लोरी, दूध की कटोरी' इसी श्रेणी में आती है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गीत आज भी उतनी ही ताजगी और भावनाओं के साथ सुना जाता है, जितनी 49 साल पहले सुना जाता था।
इस लोरी को मुकेश और लता मंगेशकर की जादुई आवाजों ने सजाया है। इन दोनों महान गायकों का संगम इस गीत को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाता है। संगीतकार आरडी बर्मन ने इस गीत में जो धुन पिरोई है, वह आज भी लोगों के दिलों में बचपन की यादें ताजा कर देती है। यह गीत भारतीय सिनेमा के सबसे भावुक गीतों में से एक माना जाता है।
फिल्म 'मुक्ति' में शशि कपूर मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म के गीतों ने उस दौर में काफी लोकप्रियता हासिल की थी। विशेष रूप से यह लोरी, जो आज भी हर मां की पहली पसंद बनी हुई है, अपनी सादगी और मधुरता के लिए जानी जाती है। यह गीत न केवल बच्चों को सुलाने के काम आता है, बल्कि यह बड़ों को भी उनके बचपन के दिनों की याद दिलाता है।
आज के दौर में भी जब संगीत की दुनिया में बहुत बदलाव आ चुके हैं, इस तरह के सदाबहार गीतों की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि यह लोरी आज भी उतनी ही लोकप्रिय है जितनी अपनी रिलीज के समय थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अच्छा संगीत कभी पुराना नहीं होता।
मुकेश की भावपूर्ण आवाज और लता मंगेशकर की सुरीली गायकी का मेल इस गीत को एक कालजयी रचना बनाता है। आरडी बर्मन का संगीत इस गीत की आत्मा है, जो सुनने वाले को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। यह लोरी भारतीय परिवारों में आज भी एक अनिवार्य हिस्सा बनी हुई है, जिसे हर पीढ़ी के लोग पसंद करते हैं।
अंत में, यह गीत न केवल एक फिल्म का हिस्सा है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और भावनाओं का एक अभिन्न अंग बन चुका है। 49 साल बाद भी इसकी लोकप्रियता यह दर्शाती है कि संगीत की शक्ति कितनी व्यापक है। यह लोरी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचपन की एक मीठी याद बनी रहेगी, जो संगीत के माध्यम से हमेशा जीवित रहेगी।