69 साल बाद भी कॉर्पोरेट जीवन की सच्चाई बयां करता है 'मदर इंडिया' का यह सदाबहार गाना
साल 1957 की फिल्म 'मदर इंडिया' का गाना 'दुनिया में हम आये हैं' आज भी कॉर्पोरेट कर्मचारियों के जीवन पर सटीक बैठता है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शकील बदायूनी के बोल और मंगेशकर बहनों की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया है। यह गाना दशकों बाद भी लोगों को अपनी जिंदगी से जुड़ा हुआ महसूस होता है।
VIMARSHNAARAD TVहिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म 'मदर इंडिया' का एक गाना आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 69 साल पहले आया यह गाना 'दुनिया में हम आये हैं' आज के दौर के कॉर्पोरेट कर्मचारियों की जीवनशैली को बखूबी दर्शाता है।
इस गाने के बोल मशहूर गीतकार शकील बदायूनी ने लिखे थे। उनकी लेखनी ने इस गीत को एक ऐसी गहराई दी है कि यह हर पीढ़ी के लोगों को अपने से जुड़ा हुआ लगता है।
गाने में मंगेशकर बहनों की आवाज का जादू है। उनकी दर्दभरी और भावपूर्ण आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया है। यही कारण है कि इतने वर्षों के बाद भी यह गाना लोगों के दिलों में बसा हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले लोग अक्सर इस गाने के जरिए अपनी आपाधापी भरी जिंदगी को जोड़कर देखते हैं। काम का दबाव और जीवन की भागदौड़ के बीच यह गाना एक आईने की तरह काम करता है।
फिल्म 'मदर इंडिया' साल 1957 में रिलीज हुई थी। तब से लेकर अब तक इस गाने की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। यह गीत समय की कसौटी पर खरा उतरा है।
शकील बदायूनी के शब्दों में वह सादगी और सच्चाई है जो आज के दौर की जटिलताओं को भी बयां कर देती है। यही इस गाने की सबसे बड़ी खूबी है।
मंगेशकर बहनों की गायकी ने इस गीत को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है। उनकी आवाज में जो दर्द और संवेदना है, वह सुनने वाले को गहराई से प्रभावित करती है।
आज के कॉर्पोरेट कर्मचारी जब इस गाने को सुनते हैं, तो उन्हें अपनी जिंदगी की सच्चाई का एहसास होता है। यह गाना उन्हें अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच रुककर सोचने पर मजबूर कर देता है।
यह गीत साबित करता है कि अच्छी कला कभी पुरानी नहीं होती। 69 साल बाद भी यह गाना उतना ही प्रासंगिक है जितना कि अपनी रिलीज के समय था।