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ईटानगर में सीसीआरएएस की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की बैठक संपन्न, अनुसंधान पर जोर

आयुर्वेदिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (सीसीआरएएस) की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की बैठक ईटानगर में आयोजित की गई. बैठक में अनुसंधान कार्यक्रमों, संस्थागत विकास और आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई.

ईटानगर में सीसीआरएएस की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की बैठक संपन्न, अनुसंधान पर जोर
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

ईटानगर स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान में सीसीआरएएस की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की बैठक संपन्न हुई. इस बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ सांख्यिकीय सलाहकार सत्यजीत पॉल ने की. बैठक का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और संबंधित विज्ञानों में वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देना था.

सीसीआरएएस के महानिदेशक और समिति के सदस्य सचिव प्रो. (वैद्य) रबी नारायण आचार्य ने परिषद की प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं का विवरण प्रस्तुत किया. बैठक में चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों, बुनियादी ढांचे के विकास और संस्थागत पहलों की विस्तृत समीक्षा की गई.

समिति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आयुर्वेद के क्षेत्र में होने वाले शोध का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए. आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने और लोगों तक इनकी पहुंच बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया गया.

बैठक में आयुष मंत्रालय और सीसीआरएएस के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. इनमें डॉ. ए. रघु, डॉ. संतोष कुमार भट्टेड, डॉ. विवेकानंदन कलाईसेल्वन, अमरेंद्र सिंह, विजयलक्ष्मी भारद्वाज, दीपक कोचर और डॉ. प्रताप मखीजा शामिल थे.

समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने सीसीआरएएस द्वारा शोध और विकास के क्षेत्र में की गई प्रगति की सराहना की. उन्होंने पिछले वित्त वर्ष के दौरान आवंटित कोष का शत-प्रतिशत उपयोग करने के लिए परिषद के प्रयासों की प्रशंसा की.

बैठक का समापन वैज्ञानिक शोध को और अधिक सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ हुआ. समिति ने इस बात पर बल दिया कि शोध के परिणामों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सार्थक फायदों में बदला जाना चाहिए.

पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, भविष्य में संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और कार्यक्रमों को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर भी सहमति बनी है. यह बैठक आयुर्वेद अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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