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सामाजिक न्याय मंत्रालय ने छात्रवृत्ति और डिजिटल सुधारों से शैक्षिक सशक्तिकरण को दी नई गति

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अनुसूचित जाति, ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और डिजिटल सुधार लागू किए हैं। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत अरबों रुपये जारी किए गए हैं। डीबीटी और आधार-आधारित प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों से वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने छात्रवृत्ति और डिजिटल सुधारों से शैक्षिक सशक्तिकरण को दी नई गति
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वंचित समुदायों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने बताया कि विभाग अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और घुमंतू जनजातियों के लिए शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने हेतु निरंतर प्रयास कर रहा है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को कम करना और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण संस्थानों तक पहुंचने में मदद करना है।

प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने और ड्रॉप-आउट दर को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत 4,893.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई, जिससे लगभग 299.66 लाख लाभार्थियों को लाभ मिला। केवल वर्ष 2025-26 में ही 562.36 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जिससे 26.79 लाख छात्र लाभान्वित हुए।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। इस योजना का लक्ष्य माध्यमिक शिक्षा के बाद आने वाली आर्थिक चुनौतियों को दूर करना है। पिछले एक दशक में इस योजना के तहत 46,581.54 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है, जिससे 612.98 लाख छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिली है। वर्ष 2025-26 के दौरान 6,186.95 करोड़ रुपये जारी कर 47.53 लाख छात्रों को सहायता दी गई।

डिजिटल सुधारों ने छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया है। वर्ष 2021-22 से पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे राशि सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में पहुंचती है। इससे न केवल देरी और लीकेज में कमी आई है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ी है।

विभाग ने फर्जी लाभार्थियों को हटाने के लिए डुप्लीकेशन-रोधी व्यवस्था लागू की है। अब लाभार्थियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। डिजिलॉकर और एपीआई सेतु के साथ एकीकरण से दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन भी सुगम हो गया है।

विभिन्न शैक्षणिक डेटाबेस जैसे एआईएसएचई और यूडीआईएसई के साथ एकीकरण से संस्थागत रिकॉर्ड का मिलान करना आसान हो गया है। बहुस्तरीय जांच प्रणाली विसंगतियों को रोकने में प्रभावी साबित हो रही है। यूआईडीएआई और एनपीसीआई के साथ समन्वय से धनराशि के प्रवाह का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है।

सचिव सुधांश पंत ने विश्वास जताया कि प्रौद्योगिकी-आधारित सुधार और निरंतर वित्तीय सहायता वंचित समुदायों के छात्रों के लिए शिक्षा के नए द्वार खोलेगी। मंत्रालय का लक्ष्य एक ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाना है, जो अंतिम छोर तक के छात्रों को सशक्त बना सके।

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मूल संदर्भ

01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗