43वां भारतीय तटरक्षक कमांडर सम्मेलन: रक्षा राज्य मंत्री ने समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी तैयारी पर जोर दिया
नई दिल्ली में 43वें भारतीय तटरक्षक कमांडर सम्मेलन का आयोजन किया गया। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने तटरक्षक बल के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें उभरती समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर जोर दिया। मंत्री ने 'मेक इन इंडिया' के माध्यम से आत्मनिर्भरता और 'महासागर' दृष्टिकोण के तहत समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने का आह्वान किया।

नई दिल्ली में 17 सितंबर 2026 को 43वें भारतीय तटरक्षक कमांडर सम्मेलन की शुरुआत हुई। तीन दिनों तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण आयोजन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक परमेश शिवमणि और अन्य वरिष्ठ कमांडरों के साथ राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
अपने संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री ने समुद्र में संकट के समय प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले बल के रूप में तटरक्षक बल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल ने राष्ट्रीयता का भेदभाव किए बिना संकट में फंसे लोगों की जान बचाकर एक मिसाल कायम की है। उन्होंने बल को तेजी से बदलती तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने की सलाह दी।
श्री सेठ ने युद्ध के बदलते स्वरूप और सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख करते हुए नेटवर्क, सेंसर, डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर क्षमताओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईसीजी से आग्रह किया कि वे केवल तकनीक के उपयोगकर्ता न बनें, बल्कि स्टार्ट-अप्स और डीआरडीओ के साथ मिलकर सह-निर्माता की भूमिका निभाएं।
आत्मनिर्भरता के विषय पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ केवल भारतीय उत्पाद खरीदना नहीं है, बल्कि ऐसी क्षमताएं विकसित करना है जो वैश्विक स्तर की चुनौतियों का समाधान कर सकें। यह दृष्टिकोण 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा।
मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में तटरक्षक बल की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए विकसित तकनीकें खोज और बचाव कार्यों में भी सहायक होती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'महासागर' (क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि के लिए पारस्परिक और समग्र प्रगति) दृष्टिकोण के अनुरूप समुद्री क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के दौरान आईसीजी कमांडर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और नौसेना प्रमुख के साथ भी संवाद करेंगे। यह चर्चा अंतर-सेवा सहयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह सम्मेलन कमांडरों को पिछले एक वर्ष की परिचालन तैयारियों, रसद सहायता और प्रशासनिक पहलों की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह भू-राजनीतिक गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए समुद्री हितों की रक्षा के लिए भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित करने में भी मदद करेगा।
