IMEI नंबर के साथ छेड़छाड़ पर सरकार सख्त, दूरसंचार सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू
भारत सरकार ने मोबाइल डिवाइस की सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए IMEI नंबरों के साथ छेड़छाड़ को गंभीर अपराध घोषित किया है। दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत, ऐसे कृत्यों में शामिल होने पर तीन साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। नागरिकों को संचार साथी पोर्टल के माध्यम से अपने डिवाइस की प्रामाणिकता की जांच करने और अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदारी करने की सलाह दी गई है।

भारत में डिजिटल क्रांति के साथ दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार तेजी से हुआ है, जहां जुलाई 2026 तक वायरलेस मोबाइल ग्राहकों की संख्या 120 करोड़ से अधिक हो गई है। इस बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में सुरक्षा सर्वोपरि है। इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI) नंबर, जो किसी भी मोबाइल डिवाइस की विशिष्ट पहचान है, के साथ छेड़छाड़ करना नेटवर्क सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
दूरसंचार विभाग के अनुसार, IMEI नंबर के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, जैसे उसे मिटाना, बदलना या ऐसे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का उपयोग करना जो पहचान को छिपाते हों, पूरी तरह से गैर-कानूनी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उपकरणों का निर्माण, तस्करी या उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
IMEI नंबर 15 अंकों का एक विशिष्ट कोड होता है, जिसके शुरुआती आठ अंक 'टाइप एलोकेशन कोड' (TAC) कहलाते हैं। यह कोड ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (GSMA) द्वारा आवंटित किया जाता है। उपयोगकर्ता अपने फोन से *#06# डायल करके अपना IMEI नंबर देख सकते हैं और 'संचार साथी' पोर्टल या ऐप के जरिए इसकी वैधता की जांच कर सकते हैं।
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विनिर्माताओं, आयातकों और विक्रेताओं की जवाबदेही तय की गई है। सभी दूरसंचार उपकरणों को 'डिवाइस सेतु-आईसीडीआर' पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य है। विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल वैध और बिना छेड़छाड़ वाले डिवाइस ही बेचें। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे संदिग्ध मॉडेम, सिम बॉक्स या छेड़छाड़ किए गए उपकरणों का उपयोग न करें। साथ ही, किसी अन्य के नाम पर सिम कार्ड लेना या अपने सिम को दूसरों को हस्तांतरित करना भी जोखिम भरा हो सकता है। मोबाइल डिवाइस हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें और सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड या बायोमेट्रिक लॉक का उपयोग करें।
यदि किसी का मोबाइल खो जाता है या चोरी हो जाता है, तो उसे तुरंत स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करना चाहिए। इसके बाद, 'संचार साथी' पोर्टल पर पुलिस रिपोर्ट और वैध आईडी के साथ ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है। डिवाइस मिलने पर, उसी पोर्टल के माध्यम से उसे अनब्लॉक करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42 के तहत, दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ करने या धोखाधड़ी से सिम प्राप्त करने पर तीन साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ये अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में आते हैं, जो डिजिटल सुरक्षा के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।
अंततः, भारत का डिजिटल भविष्य सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है। सरकार के कड़े कानूनों और नागरिकों की जागरूकता के मेल से ही दूरसंचार नेटवर्क को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
