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दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन- हैदराबाद में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को किया संबोधित

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन- हैदराबाद में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को किया संबोधित सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है, कुछ नहीं किया तो ये चीटिंग हो जाएगी- श्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र और राज्य मिलकर हैं टीम एग्रीकल्चर, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद बढ़ाना जरूरी- केंद्रीय कृषि मंत्री क

दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन- हैदराबाद में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को किया संबोधित
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कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय

दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन- हैदराबाद में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्रीय कृषि कॉन्फ्रेंस को किया संबोधित

सिर्फ ईटिंग, मीटिंग, सीटिंग नहीं, परिणाम देना है, कुछ नहीं किया तो ये चीटिंग हो जाएगी- श्री शिवराज सिंह चौहान

केंद्र और राज्य मिलकर हैं टीम एग्रीकल्चर, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद बढ़ाना जरूरी- केंद्रीय कृषि मंत्री

कॉन्फ्रेंस में किए गए कमिटमेंट समय सीमा में पूरे होने चाहिए, वरना पूरी एक्सरसाइज बेकार हो जाएगी- श्री शिवराज सिंह चौहान

तेलंगाना और कर्नाटक फार्मर आईडी बनाने में 75% से ऊपर पहुंचे, केरल, तमिलनाडु और अंडमान को और मेहनत की जरूरत- केंद्रीय कृषि मंत्री

एग्रीस्टैक और फार्मर आईडी पर राज्यों को समयबद्ध तरीके से काम करना होगा- श्री शिवराज सिंह चौहान

लैंड पार्सल को किसान रजिस्ट्री से जोड़ने और लैंड रिकॉर्ड डेटा के समन्वय का काम तेजी से पूरा करें राज्य- श्री शिवराज सिंह चौहान

13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों को मिलेगा भारत विस्तार का लाभ, अपनी भाषा में सवाल पूछकर पा सकेंगे सलाह- श्री शिवराज सिंह चौहान

लैब से लैंड तक रिसर्च पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों को किसानों के बीच ले जाएं राज्य- श्री शिवराज सिंह चौहान

भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर और दुनिया का फूड बास्केट बनाना है, यह असंभव नहीं- श्री शिवराज सिंह चौहान

28-29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेंस, राज्यों के फसलवार प्लान को दिया जाएगा अंतिम रूप- श्री शिवराज सिंह चौहान

क्षेत्रीय कृषि कांफ्रेंस में कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों की गैरमौजूदगी, कृषि मंत्री भी नहीं हुए शामिल

प्रविष्टि तिथि: 18 SEP 2026 7:58PM by PIB Delhi

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों की रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यों को कृषि क्षेत्र में तय किए गए लक्ष्यों और कमिटमेंट को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दिनभर में जिन विषयों पर चर्चा हुई है उसमें से जो एक्शनएबल पॉइंट्स हैं , उन पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर एक एग्रीकल्चर टीम हैं। हमारे साइंटिस्ट , हमारे किसान , केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी , भारत की एक टीम एग्रीकल्चर है। हम मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि इस कांफ्रेंस में राज्यों ने जो कमिटमेंट दिए हैं , उन्हें पूरा करना होगा , नहीं तो ये एक्सरसाइज बेकार हो जाएगी। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर किसी राज्य ने फार्मर आईडी का काम दिसंबर तक पूरा करने का कमिटमेंट किया है तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। अलग - अलग कामों को दोहराने की जरूरत नहीं है , लेकिन उन पर कार्रवाई जरूरी है।

सिर्फ ईटिंग , मीटिंग , सीटिंग नहीं , परिणाम देना है केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगर कॉन्फ्रेंस के बाद तय किए गए काम नहीं हुए तो पूरी कवायद बेकार हो जाएगी। एक दिन हम आए , ईटिंग , मीटिंग , सीटिंग कर ली और कुछ नहीं किया तो ये चीटिंग हो जाएगी जनता के साथ। ये हमको नहीं करना है , हमको परिणाम देना है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि ऊपर बैठी हुई टीम , कृषि मंत्री और नीचे काम करने वाली टीम मिलकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , मेरी तो हसरत है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। हम कृषि की सूरत बदल के ही मानेंगे। साथ ही केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान यह तय किया गया था कि राज्य जब भी तारीख तय करेंगे , भारत सरकार के वैज्ञानिक और केवीके के वैज्ञानिक उनके साथ जाएंगे। वैज्ञानिक गांवों और खेतों में जाएंगे , किसानों के साथ बैठेंगे और किसान , वैज्ञानिक व कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर चर्चा करेंगे।

फार्मर आईडी और एग्री स्टैक पर तेजी से काम करें राज्य श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्री स्टैक कितना महत्वपूर्ण है , यह सभी राज्यों ने समझा होगा। फार्मर आईडी बनाने के काम में काफी प्रगति हुई है। तेलंगाना और कर्नाटक 75 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गए हैं। वहीं , तमिलनाडु , कर्नाटक और तेलंगाना में जियो रिफरेंसिंग का काम भी अच्छा हुआ है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे में अंडमान निकोबार , आंध्र प्रदेश , तेलंगाना , कर्नाटक और केरल ने पूर्णता हासिल की है , लेकिन जहां फार्मर आईडी बनाने में अभी और मेहनत की जरूरत है , उनमें केरल , तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित समय सीमा के भीतर फार्मर आईडी का काम पूरा करना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र की कई व्यवस्थाएं इस पर निर्भर रहेंगी। कोई राज्य पीछे नहीं रह जाए , यह मेरी अपेक्षा है।

लैंड रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री का समन्वय जरूरी केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहां लैंड पार्सल अभी नहीं जुड़े हैं , विशेषकर तमिलनाडु और केरल में , वहां इस काम को तेजी से पूरा करना होगा। लैंड रिकॉर्ड डेटा का किसान रजिस्ट्री के साथ समन्वय भी केरल को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों में टेनेंट फार्मर्स , यानी बटाईदार या किरायेदार किसानों के लिए एसओपी बनाकर उसे नोटिफाई करने की जरूरत है। कर्नाटक , केरल , तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि गांवों के नक्शों की जियो रिफरेंसिंग का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को करना है।

13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा भारत विस्तार श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के सामने हर दिन कई तरह की समस्याएं आती हैं और हर समस्या के लिए किसान कहीं भागकर नहीं जा सकता , इसलिए केवल मोबाइल पर एक नंबर लगाकर उचित सलाह मिल सके , इसके लिए भारत विस्तार की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह हिंदी और अंग्रेजी भाषा में है , लेकिन इसे तमिल , तेलुगु , कन्नड़ , मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू किया जाएगा। किसान अपनी भाषा में सवाल पूछेंगे और उन्हें उसी भाषा में जवाब मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि आज आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री ने तेलुगु में बात की। अपनी भाषा में विचारों का प्रकटीकरण सचमुच में बहुत सटीक और परफेक्ट होता है। किसान तो अपनी भाषा ही समझते हैं , इसलिए राज्यों के साथ मिलकर इस व्यवस्था को जल्द पूरा करना होगा। साथ ही राज्य की योजनाओं को भी इससे जोड़ने का काम तेजी से करना होगा। लैब से लैंड तक पहुंचे रिसर्च केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों को जब सुविधा हो , वो 15 दिन या 20 दिन का अभियान तय कर सकते हैं और उसी समय भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे। हमारे पास 16 हजार साइंटिस्ट हैं। आईसीएआर के संस्थान , केवीके और कृषि विश्वविद्यालय केवल रिसर्च करने के लिए नहीं हैं , बल्कि रिसर्च को किसानों तक पहुंचाने के लिए भी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक आपस में नहीं बैठेंगे , रिसर्च जब तक किसान के पास नहीं पहुंचेगी , लैब से लैंड तक नहीं पहुंचेगी , तब तक काम चलेगा नहीं। भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाना है * केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वो कृषि मंत्री के रूप में भारत को कृषि में दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम करना चाहते हैं। दुनिया का फूड बास्केट इंडिया को बनाना है और यह बन सकता है , असंभव नहीं है , यह होकर रहेगा , लेकिन काम हम सबको करना है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि में काफी बदलाव आया है और आगे भी बदलाव करते हुए भारत को कृषि के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाया जाएगा। 28 और 29 सितंबर को दिल्ली में होगी रबी कॉन्फ्रेस केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी जिसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी - अपनी टीम के साथ रबी सीजन का पूरा प्लान लेकर आएंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि रबी में कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। कॉन्फ्रेंस में इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके आधार पर बीज की उपलब्धता , फर्टिलाइजर की आवश्यकता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन कर आगे की योजना तैयार की जाएगी। सम्मेलन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी के साथ-साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भी भाग लिया। सम्मेलन में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री अतीश चंद्रा तथा कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भी भाग लिया। *** एसएस / एमएस / डीके

(रिलीज़ आईडी: 2312222)

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यह जानकारी Press Information Bureau की आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित है। मूल दस्तावेज़ और पूरा संदर्भ नीचे दिए गए स्रोत लिंक पर पढ़ा जा सकता है।

SOURCES

Original references

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